G20 क्या है, G20 Kya Hai, जी 20 की स्थापना, उद्देश्य और देश

G20 Kya Hai, पूरे साल विश्व के अलग-अलग देशों में एक दूसरे के आपसी सहयोग और सुझाव के लिए देश एक दूसरे के साथ बैठकें करते है, जिससे आने वाली भविष्य की किसी भी तरह की मुश्किल परिस्थितियों से मुकाबला किया जा सके।

इसी क्रम में हर साल एक सम्मेलन कई देशों के द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसे हम G20 (G20 In Hindi) के नाम से जानते है।

Hello Dosto, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर आज के इस लेख में हम बात करने जा रहे है जी 20 के बारे में, जी20 क्या है, इसके उद्देश्य, स्थापना, इतिहास तथा अन्य चीजों के बारे में भी बात करेंगे।

G20 Kya Hai –

G20 का फुल फॉर्म “Group of 20” होता है, यह 20 देशों का एक समूह है, सही रूप में इस समूह में “19 देश” तथा एक “युरोपियन यूनियन” एक देश के रूप में गिना जाता है।

जी20 में सदस्य देशों के वित्त मंत्री तथा सेन्ट्रल बैंक के गवर्नर शामिल होते है, तथा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के द्वारा जी 20 का प्रतिनिधत्व किया जाता है।

पहले इसे केवल जी20 सम्मेलन कहा जाता था लेकिन 2007 से 2009 के बीच आई मंदी के बाद सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होने लगे जिसके बाद से इसे शिखर सम्मेलन के नाम से भी जाना जाता है।

जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान, आतंकवाद, आर्थिक संकट, मानव तस्करी, जल संकट, स्वास्थ्य, प्रवासन, जलवायु परिवर्तन, कृषि, व्यापार, वित्तीय बाज़ार, कर एवं राजकोषीय नीति, ऊर्जा, रोज़गार, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, रोज़गार बाज़ार में महिलाओं की उन्नति, वैश्विक स्वास्थ्य, सतत् विकास एजेंडा 2030, समावेशी उद्यमशीलता और ग्लोबल वार्मिंग आदि प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

g20 kya hai in hindi
G20 Kya Hai In Hindi

इसके साथ ही सदस्य देशों की किसी मुद्दे पर राय जानना, पूरे विश्व के लिए सुरक्षित वित्तीय परिस्थितियाँ बनाए रखना और परस्पर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहयोग पर विचार-विमर्श करना भी इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य होता है।

2007 की आर्थिक मंदी के बाद सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होने के बाद से हर साल शिखर सम्मेलन आयोजित किये जाते है, हालांकि इससे पहले इसे केवल G20 के नाम से जाना जाता था और ये प्रत्येक वर्ष आयोजित होता था।

यह सम्मेलन हर साल अलग-अलग सदस्य देशों के द्वारा आयोजित किया जाता है इसमें जी20 के अध्यक्ष प्रत्येक वर्ष अतिथि देशो को आमंत्रित करते है, इन देशो में स्पेन को प्रत्येक वर्ष स्थायी अतिथि के रूप में शामिल किया जाता है।

जी20 समूह, दुनिया के महत्वपूर्ण संगठनों के साथ काम करता है तथा जी20 के सदस्य देश सम्पूर्ण विश्व में घरेलू उत्पाद का लगभग 85%, पूरे विश्व में वित्तीय व्यापार का 75%, से भी अधिक तथा विश्व की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है।

हर साल होने वाले जी20 सम्मेलन में प्रतिनिधि के तौर पर 19 देशों के प्रतिनिधि और एक यूरोपीय संघ शामिल होता है।

जी20 के शिखर सम्मेलन में, 19 देशों के नेताओं और यूरोपीय संघ के नेता शामिल होते हैं और मंत्री स्तर की बैठकों में, 19 देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर और यूरोपीय संघ के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर भाग लेते है।

प्रत्येक वर्ष स्पेन के अतिरिक्त, जी20 के अतिथियों में आसियान देशों के अध्यक्ष, दो अफ्रीकी देश (अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष और अफ्रीका के विकास के लिए नई साझेदारी के प्रतिनिधि) और एक देश (कभी-कभी एक से अधिक) जी20 के अध्यक्ष द्वारा प्रत्येक बार आमंत्रित किया जाता है, हालांकि आमतौर पर वे अपने ही क्षेत्र से होते हैं।

G20 का संक्षिप्त परिचय –

स्थापनावर्ष 1999
G20_मुख्यालयकोई मुख्यालय नहीं
G20 के अध्यक्षट्रोइका के अनुसार
उद्देश्यकम आय वाले देशों को शामिल करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुनिश्चित करना
आबादीदुनिया की दो तिहाई आबादी जी20 देशों में है
जीडीपीवैश्विक जीडीपी का 85%
व्यापारवैश्विक व्यापार का 75% जी20 देशों में होता है
स्थाई अतिथिस्पेन
सदस्य देश19 देश और युरोपियन यूनियन
नया सदस्य देशअफ्रीकन यूनियन
वेबसाईटhttps://www.g20.in/

G20 की स्थापना –

जी20 की स्थापना भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय समस्या से बचने के लिए की गई वर्ष 1997 में एशियाइ वित्तीय संकट की शुरुआत होती है, यह समस्या थाइलैंड से शुरू होकर इसके आसपास के बाकी देशों तक भी पहुँच जाती है।

पूर्वी एशिया के देश थाइलैंड, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में मंदी की बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हुई, जिसके बाद में इस समस्या को दूर करने के लिए IMF के द्वारा सहयोग किया गया।

पूर्वी देशों में मौजूद थाईलैंड ने अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर दिया, इस लालच की उम्मीद में कि इससे विदेशी निवेश, देश में बढ़ जाएगा।

लेकिन परिस्थितियाँ इसके विपरीत चली गयीं, क्योंकि थाईलैंड के द्वारा उठाए गए इस कदम को अन्य पड़ोसी देशों ने भी फॉलो करना शुरू कर दिया।

इसका परिणाम यह हुआ कि इन देशों में डॉलर के मुकाबले वहाँ की करेंसी की कीमत बहुत कम हो गई और ये देश भयंकर आर्थिक मंदी में चले गए।

और जब कई देशों में एक साथ आर्थिक स्थिति गड़बड़ होती है, तो उसका प्रभाव दुनिया के बाकी देशों के ऊपर भी पड़ता है।

इस घटना के बाद एक ऐसे समूह की आवश्यकता हुई जो इन देशों का सही तरीके से प्रतिनिधित्व कर सके, वहाँ पर इनकी समस्याओं को सुना जा सके और उसके समाधान पर ठोस कदम उठाए जा सकें।

हालांकि “G20” के पहले “G7” की स्थापना काफी पहले हो चुकी थी लेकिन यह समूह देश दुनिया के शक्तिशाली और विकसित देशों का समूह था।

साउथ एशिया मे उपजे इस वित्तीय संकट के बाद एक ऐसे संगठन की आवश्यकता महसूस हुई, जिसमें G7 की तरह कम आय वाले देशों का भी एक समूह हो।

जी20 मुख्यतः उन देशों को ध्यान में रखकर बनाया गया जो विकासशील देश है।

G20 क्यों आयोजित होता है? –

जैसा कि हमने पहले भी बात की है, जी 20 का मुख्य उद्देश्य दुनिया में आने वाले आर्थिक संकट से बचना है तथा अविकसित देशों के लिए विकास की राह खोजना होता है।

जी20 का पहला सम्मेलन वर्ष 1999 में जर्मनी की राजधानी “बर्लिन” में आयोजित किया गया था, तथा इसका पहला शिखर सम्मेलन नवंबर, 2008 को ‘अमेरिका’ के ‘वाशिंगटन डीसी’ में आयोजित किया गया।

पहले जी20 के सम्मेलन में सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंदीय बैंक के गर्वनर शामिल होते थे।

और 2008 के पहले शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं किये जाते थे, लेकिन 2007 से 2009 की आर्थिक मंदी के बाद यह शिखर सम्मेलन शुरू हुआ जिसमें अब देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते है।

1929 के बाद यह ऐसा समय दूसरी बार आया, जब पूरे विश्व में वित्तीय संकट लेकर आया था।

दूसरी वैश्विक आर्थिक के दौरान फ्रांस के द्वारा यह सुझाव दिया गया कि “हमें दुनिया में ऐसे देशों के ऐसे समूह से बात करनी होगी जो कि दुनिया में माध्यम आय वाले देशों का समूह हो”

और जी20 एक ऐसा ही समूह है जो कम आय वाले देशों का ही समूह है, बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति के द्वारा पहल की गई जिसके बाद शिखर सम्मेलन शुरू हुआ जिसमें देशों के राष्ट्राध्यक्ष बैठक में भाग लेते है।

साल दर साल यह मंच विश्व में अपना स्थान बनाता गया इसकी सफलता ने अन्य देशों को भी अपनी ओर आकर्षित किया जिसे आज हम जी20 के रूप में देख रहे है।

जी20 की सफलता से यह समझ आने लगा कि अतराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के लिए तो यह सही है ही साथ में अन्य जरूरी मुद्दे जैसे – आतंकवाद, आर्थिक संकट, मानव तस्करी, जल संकट, स्वास्थ्य, प्रवासन, जलवायु परिवर्तन, कृषि, व्यापार, वित्तीय बाज़ार, कर एवं राजकोषीय नीति, ऊर्जा, रोज़गार, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, रोज़गार बाज़ार में महिलाओं की उन्नति, वैश्विक स्वास्थ्य, सतत् विकास एजेंडा 2030, समावेशी उद्यमशीलता और ग्लोबल वार्मिंग इत्यादि पर भी एक राय बनाकर उस साल का एजेंडा तय किया जा सकता है।

G20 Countries List –

जी20 में कुल 20 देश है और हाल ही में इसमें एक और नया देश “अफ्रीकन यूनियन” जुड़ा है, इस प्रकार इसे G21 भी कहा जा सकता है, जी20 के सभी सदस्य देशों के नाम कुछ इस प्रकार है।

यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है कि युरोपियन यूनियन और अफ्रीकन यूनियन कई देशों का एक समूह है, जो कि इस G20 समूह का हिस्सा है, यहाँ पर इस सभी देशों की जगह युरोपियन यूनियन को एक देश के रूप में माना जाता है।

G20 in Hindi
Countries List of G20 in Hindi

सुविधा के लिए सभी देशों को 5 ग्रुप में बांटा गया है, जिससे इसकी कार्यप्रणाली को ठीक ढंग से काम करने के लिए सुविधा हो –

Group 1

आस्ट्रेलिया (Australia) 2014
कनाडा (Canada)2010 (1)
सऊदी अरब (Saudi Arabia)2020
संयुक्त राज्य अमेरिका (United States)2008

Group 2

भारत (Bharat)2023
रूस (Russia)2013
दक्षिण अफ्रीका (South Africa)2025
तुर्किए (Turkey)2015

Group 3

अर्जेन्टीना (Argentina)2018
ब्राजील (Brazil)2024
मेक्सिको (Mexico)2012

Group 4

फ्रांस (France)2011
जर्मनी (Germany)2017
इटली (Italy) 2021
यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom)2009

Group 5

चीन (China)2016
इंडोनेशिया (Indonesia)2022
जापान (Japan)2019
दक्षिण अफ्रीका (South Africa) 2010 (2)

G20 की कार्यप्रणाली –

साल 2023 में, भारत ने G20 की अध्यक्षता की, इसके पहले इंडोनेशिया को यह अवसर दिया गया।

इस प्रकार प्रत्येक वर्ष जी20 समूह का अध्यक्ष पद सदस्य देशों के मध्य वार्षिक आधार पर एक प्रक्रिया के तहत रोटेट होता रहता है जो समय के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित होता है।

इसके साथ ही अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये 19 राष्ट्रों को 5 समूहों में विभाजित किया जाता है, प्रत्येक समूह में 4 देश से अधिक नहीं होते हैं, जिसके बारे में ऊपर जानकारी दी गई है।

यह अध्यक्ष पद वार्षिक स्तर पर प्रत्येक समूह में घूमता रहता है, इस प्रक्रिया में प्रत्येक वर्ष जी20 का कोई समूह, अध्यक्ष पद के लिये किसी अन्य समूह से किसी एक देश का चुनाव करते है।

हम देखते है कि भारत समूह 2 में है जिसमें रूस, दक्षिण अफ्रीका एवं तुर्की भी शामिल हैं।

ट्रोइका (Troika) क्या है –

प्रत्येक वर्ष, चुनाव की प्रक्रिया के बाद जब एक सदस्य देश अध्यक्ष पद ग्रहण करता है तो वह देश पिछले वर्ष के अध्यक्ष देश एवं अगले आने वाले वर्ष के अध्यक्ष देश के साथ मिलकर एक सामंजस्य बिठाकर कार्य करते है।

जी20 की इस प्रक्रिया को ही सामूहिक रूप से ट्रोइका (तीन सदस्यों का एक साथ काम करना) कहते है, यह समूह के एजेंडे की अनुकूलता एवं निरंतरता को सुनिश्चित करता है, जिससे निर्णय लेने तथा किसी निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए आसानी होती है।

G-20 कैसे काम करता है –

जी20 में, अध्यक्षता के तहत एक वर्ष के लिए जी20 एजेंडा का संचालन किया जाता है, या उस वर्ष के लिए कुछ लक्ष्य तय किये जाते है।

जी20 के अंतर्गत होने वाले कार्यों को दो ट्रैक में बांटा गया है –

वित्त ट्रैक (Finance Track) –

वित्त ट्रैक में सदस्य देशों के वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और उनके प्रतिनिधि शामिल होते है।

इन सभी महत्वपूर्ण व्यक्तियों के द्वारा कई सारी बैठकें की जाती हैं, जहां मौद्रिक और राजकोषीय मुद्दों, वित्तीय विनियमों इत्यादि पर ध्यान केंद्रित किया जाता है और ये बैठकें साल में कई बार आयोजित होती है।

शेरपा ट्रैक (Sherpa Track) –

शेरपा ट्रैक में राष्ट्राध्यक्ष के द्वारा नियुक्त किये गए प्रतिनिधि शामिल होते है, साल भर में जो बैठकें होती है, वही उन बैठकों पर नजर रखता है और शेरपा ही उस साल का एजेंडा तय करते है।

समूह में शामिल सभी देशों के अपने अपने शेरपा होते है जो कि व्यापक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके अपनी एक राय बनाते है।

शेरपा के द्वारा राजनीतिक जुड़ाव, भ्रष्टाचार विरोधी, विकास इत्यादि, मुद्दों पर चर्चा होती है।

समूह में प्रत्येक देश को इसके शेरपा (सिविल सेवक या राजनयिक) द्वारा ही संबोधित किया जाता है।

इसके अलावा शेरपा का कार्य संबंधित देश के नेता की ओर से योजना बनाना, गाइड करना और लागू करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य सौंपें जाते है।

G20 का मुख्यालय –

जी20 समूह के पास स्थायी सचिवालय या मुख्यालय नहीं होता है, क्योंकि प्रतिवर्ष इसका आयोजन अलग-अलग देशों में होता है।

और इसमें अन्य देशों को भी अतिथि के रूप में बुलाया जाता है, जो इसकी बैठक में अपनी राय रखते है, और सबकी सहमति से निर्णय लिया जाता है।

इसके अलावा जी20 समूह का अध्यक्ष अन्य सदस्यों के साथ परामर्श करके जी20 एजेंडा को लागू करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास हेतु उत्तरदायी होता है।

G20 में भारत –

जी20 के मंच पर सभी देश अपनी-अपनी बातें रखते है तथा उनपर बाकी देशों से सहयोग और उसके निवारण पर विचार करते है।

सभी देशों की तरह जी20 सम्मेलन में भारत की भी कुछ प्राथमिकताएँ है जिनके बारे में हमें जानना चाहिए –

  • भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये टैक्स चोरी की जाँच करना।
  • भारत के खिलाफ आतंकवादी वित्तपोषण को अवरुद्ध करना।
  • रेमिटेंस यानि भारत के बाहर से आने वाली आय की लागत में कटौती।
  • प्रमुख दवाओं तक बाज़ार की पहुँच।
  • विश्व व्यापार संगठन में सुधार।
  • पेरिस समझौते को पूर्णतः लागू करना।

G20 की उपलब्धियाँ –

G20 निश्चित ही अपने उद्देश्य में सफल रहा है, साल दर साल इसकी लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है, विशेषकर 2007 से 2009 के बीच आई आर्थिक मंदी के बीच जी20 वहाँ मौजूद था जहां इसे होना चाहिए, जिसका परिणाम यह हुआ कि देशों को इस मंदी से बचने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में मदद मिली, जी20 की कुछ उपलब्धियां और विशेषताएं इस प्रकार है –

जी20 समूह अपने सदस्यों के सहयोग से नई चुनौतियों से निपटने के लिये शीघ्रता से निर्णय ले पाने में सक्षम है।

समूह में आमंत्रित देशों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं सिविल सोसाइटी के मध्य समन्वयकारी समावेशन बनता है।

जी20 समूह ने देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके International Financial Regulatory System को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

जब निजी क्षेत्र के वित्तीय स्रोत कम हो गए थे तब Multilateral Development Bank से एक बार में 235 बिलियन यूएस डॉलर ऋण देने की सुविधा में वृद्धि की गई।

वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान तत्कालीन वित्तीय ज़रूरतों को शीघ्र पूरा करना जी20 समूह की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाता है।

जी20 समूह , राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के कार्य निष्पादन में सुधार करके अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सस्थाओं में सुधार करने का भी काम करता है।

जी20 ने कर पारदर्शिता के मानकों एवं G20/OECD आधार क्षरण एवं लाभ हस्तांतरण (BEPS) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय कर प्रणाली में सुधार लाए है।

जी20 समूह की मदद से ही व्यापार सुविधा समझौते के अनुसमर्थन में (Ratification of the Trade Facilitation Agreement) एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।

विश्व व्यापार संगठन ने यह अनुमान लगाया गया है कि यदि समझौते को पूर्णतः लागू किया जाता है तो यह वर्ष 2030 तक वैश्विक GDP में 5.4% से 8.7% के बीच योगदान दे सकता है।

बेहतर संचार, जी20 समूह चर्चा के माध्यम से निर्णय लेता है और इसके लिये उच्च विकसित एवं विकासशील देशों द्वारा वैश्विक मंच पर चर्चा की जाती है, जो कि किसी निर्णय लेने के लिए सभी पहलुओं पर विचार विमर्श कर पाते है।

नवंबर 2021 के जी20 शिखर सम्मेलन में, रोम घोषणा को अपनाते हुए नेताओं ने सदी के मध्य तक या उसके आसपास कार्बन तटस्थता (Carbon Neutrality) तक पहुँचने की प्रतिबद्धता दिखाई है।

हालांकि इससे पहले, जी20 जलवायु जोखिम एटलस जारी किया गया था जो जी20 देशों में जलवायु परिदृश्य, डेटा, सूचना और जलवायु में भविष्य में परिवर्तन की सूचनाएं प्रदान करता है।

G20 In India –

वर्ष 2023 में भारत ने जी20 की अध्यक्षता की कुल 10 महीने के अंदर देशभर के 60 शहरों में जी20 की 200 से ज्यादा बैठकें सम्पन्न हुई।

सम्मेलन के आखिरी चरण में 9 और 10 सितंबर को सभी राष्ट्र प्रमुख दिल्ली में मिले और वैश्विक मुद्दों पर मंथन किया और चुनौतियों से एक साथ निपटने का संकल्प लिया।

वर्ष 2023 का भारत की अध्यक्षता में ये आयोजन को प्रधानमंत्री “श्री नरेंद्र मोदी” जी के संबोधन के साथ समाप्त हुआ।

G20 Presidency List –

G20 Kya Hai in Hindi
G20 Kya Hai in Hindi

जी20 का वर्तमान अध्यक्ष कौन है?

2023 में भारत की अध्यक्षता में हुए जी 20 शिखर सम्मेलन का सफल समापन हो गया है, वर्तमान (2024) में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा को जी20 की अध्यक्षता सौंपी गई।

जी20 2023 की थीम क्या थी?

2023 में भारत में हुए जी20 का थीम था वसुधैव कुटुंबकम (Vasudhaiva Kutumbakam), इसका मतलब होता है, “एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य”, जी20 के लोगो को तिरंगे के रंग से सजाया गया है, इसमें केसरिया, सफेद और हरा रंग देखने को मिलता है और लोगो के नीचे देवनागरी लिपि में ‘भारत’ लिखा गया है।

जी20 के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?

जी20 के प्रथम अध्यक्ष के रूप में कनाडा के वित्त मंत्री पॉल मार्टिन को चुना गया और जर्मन वित्त मंत्री हंस आइचेल ने बैठक की मेजबानी की थी।

जी20 की आधिकारिक भाषा क्या है?

जी20 शिखर सम्मेलन की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश है।

जी20 का निर्माण क्यों किया गया?

जी20 का निर्माण वैश्विक आर्थिक संकट को रोकने के लिए किया गया था, लेकिन यह इतना सक्सेसफुल रहा कि धीरे धीरे अन्य जरूरी मुद्दों को भी इसमें शामिल किया गया।

Summary, G20 Kya Hai –

जी20 (G20 क्या है) के द्वारा, अलग-अलग देशों का एक मंच पर आना केवल भारत ही नहीं बल्कि सभी देशों के लिए बहुत फायदेमंद है।

यह एक दूसरे देश के बीच रिश्ते को बढ़ाता है जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास करने में सहायता मिलती है।

साल 2023 का शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया गया जो कि बहुत ही सक्सेसफुल रहा, निश्चित ही भविष्य में इसके सकरतंक परिणाम सामने आएंगे।

G20 क्या है (G20 In Hindi) के बारे में यह लेख आपको कैसा लगा नीचे कमेंट बॉक्स में अपने अनुभव लिखिएगा और इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें, Thank You 🙂

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A Student 📚, Digital Content Creator, Passion in Photography. इस ब्लॉग पर आपको टेक्नॉलजी, फाइनेंस और पैसे कमाने के तरीके से संबंधित टॉपिक्स पर जानकारियाँ मिलती रहेंगी, हमारे साथ जुड़ें - यूट्यूब, फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर

2 thoughts on “G20 क्या है, G20 Kya Hai, जी 20 की स्थापना, उद्देश्य और देश”

  1. Thanks a lot for the information
    given by you
    This information is very beneficial for the Competitive exam.
    Again Thank you So Much 😊🙏

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