IMF Kya Hai आईएमएफ़ क्या है, IMF का इतिहास और उद्देश्य

आईएमएफ़ क्या है, IMF Kya Hai, IMF in Hindi, India and IMF, जब हमें कोई प्रॉब्लम होती है तो हम किसी न किसी से मदद मांगते है या फाइनेंशियल इमरजेंसी में हम किसी से फाइनेंशियल हेल्प लेते है।

ये तो हुई व्यक्तिगत तौर पर बात, लेकिन क्या हो जब कोई देश किसी ऐसी समस्याओं से जूझ रहा हो और उसे किसी की मदद की जरूरत हो…. तो इस परिस्थिति में मदद करता है, IMF।

Hello Dosto, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर, आज इस लेख में हम बात करने जा रहे है, आईएमएफ़ के बारे में, आईएमएफ़ क्या है (IMF Kya Hai), इसके क्या काम होते है और क्यों यह हमारे लिए जरूरी है, तथा इससे जुड़े इतिहास के बारे में भी।

IMF Kya Hai –

IMF का फुल फॉर्म होता है, “International Monetary Fund”, हिंदी में इसे “अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष” कहा जाता है।

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष या IMF संयुक्त राष्ट्र संघ की एक प्रमुख वित्तीय एजेंसी है, और एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है, आईएमएफ़ का मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में स्थित है।

इसके अलावा इस संगठन के दो अन्य कार्यालय पेरिस और जेनेवा में स्थित है।

IMF Kya Hai in Hindi
IMF Kya Hai in Hindi, IMF in Hindi

आईएमएफ़ का घोषित उद्देश्य “वैश्विक मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देने, वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने, उच्च रोजगार और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाने और विश्व भर में गरीबी को कम करने के लिए है।

इस संगठन की स्थापना वर्ष 1944 में की गई और 27 दिसंबर 1945 को इसका कार्य शुरू हुआ, वर्तमान में इस संगठन में कुल 190 देश शामिल है।

IMF को बनाने का विचार, ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में मुख्य रूप से हैरी डेक्सटर वाइट और जॉन मेनार्ड केन्ज़ के द्वारा, साल 1945 में 29 सदस्य देशों के साथ औपचारिक अस्तित्व में आया, और इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली के पुनर्निर्माण का लक्ष्य रखा गया था।

नामअंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
गठन27 दिसम्बर 1945
प्रकारअंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था
उद्देश्यअंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग, सुविधाजनक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, सतत आर्थिक विकास, भुगतान संतुलन बनाए रखना, वित्तीय संकट रोकना
मुख्यालय700, 19वीं स्ट्रीट एनडब्ल्यू, वाशिंगटन, डीसी, US
सदस्यता190 देश (189 संयुक्त राष्ट्र देश और कोसोवो)
राजभाषाअंग्रेजी
मुख्य अंगराज्यपाल समिति
प्रबंध_निदेशकक्रिस्टालिना जॉर्जीवा
मुख्य अर्थशास्त्रीपियरे-ओलिवियर गौरींचास
प्रथम उप प्रबंध निदेशकगीता गोपीनाथ
पेरेंट संगठन संयुक्त राष्ट्र संघ
बजट (2022)$1.2 Billion US Dollor
वेबसाईट www.imf.org

IMF की स्थापना क्यों हुई –

1943 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय पूरा विश्व दो गुटों में बँट गया था, जिसमें एक गुट धुरी राष्ट्र और दूसरा गुट मित्र राष्ट्रों का था।

युद्ध का सबसे बाद नुकसान यह है कि देश इसके परिणाम स्वरूप कई सालों पीछे चल जाता है।

अमेरिका ने इस चीज को समझा और अपना फायदा उठाने की कोशिश की , जिसके अंतर्गत अंतराष्ट्रीय मौद्रिक कोष की स्थापना का विचार किया गया, इस विचार को व्हाइट प्लान का नाम दिया गया।

इसी समय काल में अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध में नुकसान उठाने वाले देशों को कर्ज देने की शुरुआत की।

इसी समयकाल में ब्रिटेन भी कुछ इसी तरह की योजना पर काम कर रहा था, जिसे कीन्स प्लान के नाम से जाना जाता है।

बाद में अमेरिका और ब्रिटेन के दोनों प्लान को एकसाथ मिलकर IMF की शुरुआत की गई।

जुलाई 1944 में अमेरिका में ‘ब्रिटेनवुड्स’ के ‘न्यूहैम्पशायर’ अधिवेशन में दो नए संगठन “आईएमएफ़” और “वर्ल्ड बैंक” अस्तित्व में आए।

इसके बाद 27 दिसंबर 1945 को आईएमएफ़ की शुरुआत हुई और 1 मार्च 1947 को यह पूरी तरह से कार्य करने की शुरुआत की।

इसके कुछ महीनों के बाद नवंबर 1947 को, “संयुक्त राष्ट्र संघ” के एक अंग के रूप में इसे स्वीकार किया गया।

IMF और World Bank –

आईएमएफ़ और वर्ल्ड बैंक देखने में तो दोनों एक जैसे लगते है और काम भी इनका लगभग एक जैसा ही है।

लेकिन इन दोनों में एक फर्क है, वर्ल्ड बैंक तब लोन देता है जब किसी देश को कोई डेवलोपमेंट का काम करना हो।

जबकि आईएमएफ़ किसी भी देश को आपदा की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान करता है।

आईएमएफ़ का उद्देश्य –

1. युद्ध की स्थिति और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में अक्सर एक देश से दूसरे देश के बीच व्यापार का संतुलन बिगड़ने पर इसका प्रतिकूल प्रभाव अन्य देशों के ऊपर पड़ता है।

इन सबसे बचने के लिए जीतने भी अंतराष्ट्रीय व्यापार एक देश से दूसरे देश के बीच होते है, उसे संतुलित करने का काम आईएमएफ़ के द्वारा किया जाता है।

2. आईएमएफ़ के द्वारा एक्सचेंज रेट को संतुलित करने का काम किया जाता है, जो कि एक देश से दूसरे देश के बीच करेंसी कन्वर्जन रेट को मेंटेन करके रखते है।

3. आईएमएफ़ इसके सदस्य देशों के बीच अंतराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग स्थापित करता है।

4. बहुपक्षीय (मल्टीलेटरल) भुगतान की व्यवस्था करने का कार्य IMF के द्वारा किया जाता है।

5. IMF का कार्य आर्थिक और वित्तीय घटनाओं पर नज़र रखना और यह देखना कि देश कैसा प्रदर्शन कर रहे है।

6. अपने सदस्य देशों को उनकी अर्थव्यवस्थाओं को सुधारने के बारे में सलाह देना साथ ही संघर्ष कर रहे देशों को अल्पकालिक ऋण और सहायता जारी करना।

आईएमएफ की उपलब्धियाँ –

IMF को अक्सर “अंतिम उपाय के ऋणदाता” के रूप में वर्णित किया जाता है, संकट के समय में, देश वित्तीय सहायता के लिए इसकी ओर देखते हैं।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री “बेंजामिन फ्रीडमैन” का तर्क है कि इसकी प्रभावशीलता को मापना मुश्किल है क्योंकि यह जानना असंभव है कि क्या इसके हस्तक्षेप ने चीजों को बेहतर बनाया है या “जो भी विकल्प होता उससे भी बदतर”।

हालाँकि, कुछ लोगों ने मेक्सिको द्वारा 1980 के दशक की शुरुआत में अपना ऋण चुकाने में असमर्थ होने की घोषणा के बाद समर्थन देने में फंड की भूमिका की प्रशंसा की।

2002 में, ब्राज़ील ने अपने ऋणों पर चूक से बचने के लिए आईएमएफ ऋण प्राप्त किया और इसके बाद सरकार अनुमानित विकास की अपेक्षाकृत तेज़ी से अर्थव्यवस्था को बदलने में सक्षम रही और निर्धारित समय से दो साल पहले ही अपना पूरा कर्ज़ चुका दिया।

आईएमएफ के साथ समस्यायें –

आईएमएफ जिन देशों को पैसा उधार देता है उन पर जो शर्तें लगाता है उनकी कभी-कभी बहुत कठोर होने के कारण आलोचना की जाती है।

इनमें देशों को सरकारी उधारी कम करने, कॉर्पोरेट करों में कटौती करने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को विदेशी निवेश के लिए खोलने के लिए मजबूर करना जैसी कठोर शर्तें शामिल है।

साल 2009 में ग्रीस (देश) में यूरोज़ोन वित्तीय संकट शुरू हुआ था और इसकी अर्थव्यवस्था सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

आईएमएफ से बेलआउट ऋण प्राप्त करने के बाद, ग्रीस को अपनी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़े।

आलोचकों ने कहा कि आईएमएफ ने जिस मितव्ययिता नीति का पालन करने पर ग्रीस पर जोर दिया – जिसका उद्देश्य सरकारी उधारी कम करना था – वह अत्यधिक थी और इससे उसकी अर्थव्यवस्था और समाज को नुकसान पहुंचा।

इसके अलावा अभी हम पाकिस्तान को देख सकते है, वर्तमान में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, यह देश तमाम आर्थिक समस्याओं के दौर से गुजर रहा है।

ऐसे में आईएमएफ़ ने पाकिस्तान को लोन देने के लिए बहुत कठिन शर्तें रख दी है, जिससे पाकिस्तान के लिए लोन मिल पाना मुश्किल हो गया है।

आईएमएफ़ की शर्तें –

किसी भी देश को आर्थिक सहायता देने के लिए आईएमएफ़ अपनी कुछ शर्तें रखता है, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है।

इसके पीछे उद्देश्य यह है कि जो भी देश जिस कार्य से सहायता ले रहा है वह उसके लिए लाभदायक सिद्ध हो, तथा भविष्य में वह उसे वापस भी कर सक्ने में सक्षम हो।

आईएमएफ को ऋण के लिए देशों से संपार्श्विक की आवश्यकता होती है, लेकिन नीति सुधार के रूप में अपने व्यापक आर्थिक असंतुलन को ठीक करने के लिए सरकार से भी सहायता की आवश्यकता होती है।

यदि शर्तें पूरी नहीं की जाती हैं, तो धनराशि रोक दी जाती है, सशर्तता की अवधारणा 1952 के कार्यकारी बोर्ड के फैसले में पेश की गई थी और बाद में समझौते के लेखों में शामिल की गई थी।

संरचनात्मक समायोजन की कुछ शर्तों में शामिल हो सकती है –

  • देश को अपने व्यय में कटौती करना और राजस्व बढ़ाना होगा, जिसे मितव्ययता भी कहा जाता है, इसे कम करना होगा।
  • प्रत्यक्ष निर्यात और संसाधन निष्कर्षण पर आर्थिक उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
  • अपनी मुद्राओं का अवमूल्यन, व्यापार उदारीकरण या आयात और निर्यात प्रतिबंध हटाना।
  • निवेश की स्थिरता बढ़ाना ( घरेलू बाजार के लिए सुविधाओं के उद्घाटन के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को पूरक करके), बजट संतुलित करना और अधिक खर्च न करना।
  • मूल्य नियंत्रण और राज्य सब्सिडी हटाना, निजीकरण, या राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के सभी या कुछ हिस्सों का विनिवेश के लिए दरवाजे खोलना।
  • राष्ट्रीय कानूनों की तुलना में विदेशी निवेशकों के अधिकारों को बढ़ाना ,
    शासन में सुधार और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए आवश्यक सुधार करना।

ये सभी कुछ ऐसे शर्तें है जो कि IMF (IMF Kya Hai in Hindi) के द्वारा देशों से अपेक्षा की जाती है, इन शर्तों को वाशिंगटन सर्वसम्मति के रूप में जाना जाता है।

IMF के सदस्य देश –

वर्तमान में आईएमएफ़ के कुल 190 सदस्य देश है, नीचे चित्र में इस संगठन के सदस्य देशों के बारे में जानकारी दी गई है –

imf kya hai in hindi
imf kya hai in hindi

IMF Quota –

आईएमएफ को अपना पैसा अपने सदस्य देशों से कोटा और सदस्यता के माध्यम से मिलता है।

ये योगदान देश की अर्थव्यवस्था के आकार पर आधारित हैं, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला अमेरिका सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन जाता है।

जब कोई भी देश आईएमएफ़ को ज्वाइन करता है तो उसे एक कोटा दिया जाता है, ये कोटा यह निर्धारित करता है कि उसकी जीडीपी कितनी है उसकी ईकानमी कितनी ओपन है और वह देश आने वाले आर्थिक उतार चढ़ाव को कितना जल्दी रिकवर कर लेता है।

इस कोटे को एक फॉर्मूले के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जो यह निर्धारित करता है कि किसी देश की कितनी पावर होगी निर्णय लेने के लिए और साथ ही उसे कितना फाइनेंशियल सपोर्ट मिल सकता है आईएमएफ़ के द्वारा।

IMF Kya Hai in Hindi
IMF Kya Hai in Hindi
IMF Kya Hai in Hindi
IMF Kya Hai in Hindi

इस कोटा को SDR (special Drwaing Right) के रूप में पुकार जाता है, SDR, आईएमएफ़ की एक यूनिट है, यह करेंसी नहीं है लेकिन इसकी एक वैल्यू होती है, जो कि 5 मुद्राओं यूएस डॉलर, यूरो, जापानीज येन और चाइनीज युवान और ब्रिटिश पाउन्ड स्टर्लिंग के द्वारा निर्धारित की जाती है।

ये करेंसी पंच सबसे ज्यादा एक्सपर्ट करने वाले देशों की मुद्राएं है और इन्हीं में सबसे ज्यादा ट्रेड होते है।

India and IMF –

भारत आईएमएफ़ के संस्थापक सदस्यों में से एक है, वर्ष 1993 के बाद से, भारत ने IMF से वित्तीय मदद नहीं मांगी है।

भारत के वित्त मंत्री IMF के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में पदेन गवर्नर के रूप में कार्य करते है।

इसके अलावा, राज्यों के राज्यपाल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) IMF के वैकल्पिक गवर्नर के रूप में कार्य करते है।

2022 के हिसाब से भारत का IMF कोटा SDR (विशेष आहरण अधिकार) 5,821.5 मिलियन है, जो इसे कोटा रखने वाले देशों में 13वें स्थान पर रखता है और इसे 2.44% हिस्सेदारी प्रदान करता है।

हालाँकि, वोटिंग शेयर के मामले में, भारत (अपने निर्वाचन क्षेत्र के देशों बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका के साथ) कार्यकारी बोर्ड में 24 में से 17 वें स्थान पर (2022 के डेटा अनुसार) मौजूद है।

IMF in Hindi, IMF Kya Hai, इसके बारे में आप इस विडिओ के माध्यम से भी जानकारी ले सकते है, जिसमें IMF ki Sthapna से लेकर सभी चीजों के बारे में जानकारी कवर की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल –

कौन से 7 देश IMF के सदस्य नहीं है?

Cuba, North Korea, Monaco, Taiwan, Vatican City, and East Timor Liechtenstein, आईएमएफ़ के सदस्य नहीं है।

IMF की स्थापना क्यों हुई?

युद्ध की स्थिति और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में, आर्थिक और वित्तीय घटनाओं की स्थिति में सदस्यों देशों में आर्थिक और वित्तीय स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए।

IMF की स्थापना कब हुई?

IMF का गठन 27 दिसम्बर 1945 को किया गया था।

आईएमएफ़ के कितने सदस्य देश है?

IMF के 190 सदस्य देश है, (189 संयुक्त राष्ट्र देश और कोसोवो)

क्या आईएमएफ ने गरीबी कम की है?

कुछ वेबसाईट्स के द्वारा दिए गए डेटा से पता चलता है कि, सामान्य तौर पर, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान (आईएमएफ) कार्यक्रमों ने गरीबी और आय में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की है।

Summary –

तो दोस्तों, IMF Kya Hai, IMF in Hindi के बारे में यह लेख आपको कैसा लगा अपने अनुभव और यदि कोई सवाल या सुझाव हो तो उसे कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें, Thnak You 🙂

यह आर्टिकल भी पढ़ें –

  1. Internet क्या है
  2. जीएसटी क्या है
  3. मेगापिक्सल क्या होता है
  4. G20 क्या है
  5. इंटरनेट कैसे चलता है
  6. पोस्टल कोड क्या होता है
  7. AI क्या है
  8. पिन कोड क्या होता है

A Student 📚, Digital Content Creator, Passion in Photography. इस ब्लॉग पर आपको टेक्नॉलजी, फाइनेंस और पैसे कमाने के तरीके से संबंधित टॉपिक्स पर जानकारियाँ मिलती रहेंगी, हमारे साथ जुड़ें - यूट्यूब, फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर

Leave a Comment

Latest Posts

Home     About Us    Contact Us    Privecy Policy    T&C    Disclaimer    DMCA